Rukmani Vivah Bhajan Lyrics

विदर्भ नगरी में शोर मचा,
रुक्मणी के मन में आस जगी।
श्याम नाम बस गया हृदय में,
सांस-सांस में विश्वास जगी।

राजा रुक्मी की चली ना मर्जी,
मन में कपट विचार बसाया।
लेकिन प्रेम की शक्ति देखो,
कृष्ण ने ही मार्ग दिखाया।

रुक्मणी लिख बैठी प्रेम पत्र,
कँपते हाथ, नयनों में नीर।
हे द्वारिकाधीश, आ जाओ अब,
तुम बिन सूना ये संसार वीर।

घोड़े पर सवार हो श्याम आए,
बंसी मधुर बजाई।
रुक्मणी का हाथ थामकर,
प्रेम कथा अमर बनाई।

फूले गगन, झुकी धरती,
देवों ने मंगल गान किया।
रुक्मणी-कृष्ण विवाह हुआ,
धर्म ने फिर सम्मान लिया।

आज भी जो यह कथा सुने,
मन में जागे विश्वास।
सच्चा प्रेम और सच्ची भक्ति,
हर दुख का करे नाश।

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